Home > Letters from our Fellows > Ravi | Jaipur II

आज मेरे पास कुछ भी शब्द नहीं हैं। अपने अनुभव बताने के लिए ऐसा लग कुछ खली-खली सा महसूस कर रहा हूँ पता नहीं आज मैं अपने मन को इतना बेचैन प रहा हूँ । कुछ समझ नहीं आ रहा है। किस तरह अपने अनुभव को शेयर करूँ। कुछ अजीब सा फील कर रहा हूँ। ऐसे लग रहा है जैसे मैं अपने जीवन की सबसे अच्छी व कीमती चीज़ खोने जा रहा हूँ।पता नहीं फिर भी कुछ है जो मेरे मन व दिमाग तथा दिल को काबू नहीं कर पा रहा हूँ। लेकिन मैंने अपने आप से वादा किया था की मैं कमज़ोर नहीं पडूंगा। और अपने आत्मा विशवास के साथ आगे बढ़ने तथा दूसरों के प्रेरणा बनकर उन्हें उनकी मंज़िल तक पहुंचाने का कार्य करूँगा।

जब मैं पहली बार विशाखा से जुड़ा तो मुझे नहीं पता था कि मेरे जीवन कई ऐसे लोगों से मिलना होगा जो मेरे जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा बन जायेंगे। कभी नहीं सोचा था इस बारे में। जब पहली बार आशा मैडम विशाखा आई तो मैंने उनसे प्रतीति कार्य के बारे में सुना और थोड़ा अजीब लगा कि यह किस प्रकार का कार्य जुडी हैं ।लेकिन धीरे धीरे जब उनकी बात मेरे समझ आने लगी तो मैंने तय किया कि में इसका हिस्सा बनना चाहता हूँ । और फिर मैंने प्रतीति फॉर्म भरा और अपने अन्य दोस्तों को भी बताया तो मेरे दोस्तों ने मेरा मज़ाक बना दिया और कहा कि तो यह नहीं कर सकता जो किसी दूसरों के लिए कार्य नहीं किया वह आज अपने द्वारा किसी कार्य करने बारे सोच रहा है। यह सुन कर बहुत बुरा लगा कि मेरे दोस्त मेरा साथ नहीं दे रहे हैं। जो दोस्त मेरे हर गलत कार्य मेरा साथ देते थे वे आज मेरे एक अच्छा कार्य मेरा साथ नहीं दे रहे हैं। लेकिन मैंने तय कर लिया था कि मुझे ये फॉर्म भरना ही है। उसके बाद मैंने विशाखा गोपाल जी सर बात की और इस प्रतीति फ़ेलोशिप फॉर्म भरा। उसके बाद मैं बहुत बेताबी से इसका इंतज़ार करने लगा कि कब प्रतीति फॉर्म की सूचना मिलेगी। और हर दिन विशाखा विशाखा में इसकी जानकारी लेने आने लगा। फिर एक दिन प्रतीति कि टीम से आरुषि मैडम का कॉल आया और मेरे सिलेक्शन होने कि खबर मिली मुझे बहुत ख़ुशी मिली। लेकिन मुझे इस बात कि जानकारी नहीं थी कि भेद भाव क्या होता है और यह जीवन पर किस प्रकार इसका असर होता है। क्यूंकि मैंने कभी इन बातों पर ध्यान नहीं दिया था न ही सोचा था कि मेरे द्वारा किसी के साथ भेद भाव हुआ है या किया है। लेकिन मन में एक बेचैनी सी उत्पन्न हो रही थी और वह बेचैनिं ने मुझे दो दिन सोने नहीं दिया और हर किसी को भेदभाव के बारे जानकारी प्राप्त करने कि कोशिश करने लगा लेकिन मुझ किसी कुछ जानकारी नहीं मिली । परेशान हो कर में विशाखा लौट आया। जब हमारा जाने के समय आया तो मुझे बहुत डर लगा। साथ मेरे अन्य साथियों को भी डर लगा और अजीब सा महसूस किया, लगा कि वहां तो हमसे कही समझदार और सीनियर फेल्लोस होंगे। और हम तो अभी बच्चे हैं । लेकिन वहां आने के बाद हम यह एहसास नहीं हुआ कि वह हमसे ज़्यादा सीनियर हैं तथा अपनी करेंगे। सब हमें सामान रूप स्वीकारा और उसके बाद सोमेश सर, आरुषि मैडम, आदित्य सर मिले। धीरे धीरे हम उनकी बताई हर बात को अपने जीवन उतारने लगे। साथ ही आये अन्य संस्था के सदस्य मिलकर हमें काफी ख़ुशी हुई। तथा उनके साथ बिताए हर एक पल हमें अपना सा लगने लगा। और वे हमारे जीवन का एक छोटा सा हिस्सा बन गए।

विशाखा में आने बाद हम तीनों इस कार्य करने के बारे सोचा और हमने तय किया कि हम-एक-दुसरे ताकत बनकर इस कार्य \पूरा करेंगे तथा अपनी कमी को किसी को एहसास नहीं होने देंगे। धीरे धीरे हमने विशाखा अन्य सदस्य से मिलकर इस कार्य करना शुरू किया हमें कई परेशानियों सामना करना पड़ा तथा कई बार हमारे अंदर मन मुटाव के भाव उत्पन्न होगये लेकिन हमने आप को सम्भाला और एक नयी शुरुआत की और यह नयी शुरुआत बहुत अच्छी हुई। और हमें पता नहीं चला कि हमने क्या किया / और क्या पाया।लोगों ने हमें पागल की श्रेणी लगे, उन्हें लगे कि ये तीनों तो पागल हो गए। जब देखो बैग उठाकर निकल जाते हैं। लेकिन हमें यह शब्द बहुत अच्छा लगने लगा। धीरे धीरे यह शब्द हमें अपनी उस मंज़िल तक ले गया जहां हम इसे ले जाने वाले थे। उसके बाद हम बेताबी से प्रतीति की हर मीटिंग का इंतज़ार करने लगे। और एक दूसरे मिलने तथा बात चीत करने व कार्य जानकारी बारे बताने लगे। धीरे धीरे हम और करीब आ गए और पता नहीं चला कि यह 4 महीने कब बीत गए। जब हमें आखरी मीटिंग के लिए बुलाया गया तो मैं बहुत भावुक होगया था पता नहीं मेरे मन में एक बेचैनी सी उत्पन्न हो रही थी। दूर हो जाने का एहसास हो रहा था आखिर वो पल आ गया। जब में अपने आप कंट्रोल नहीं कर पाया और मेरे आँखों में से आंसू बह गए। मैंने बहुत कोशिश कि उन्हें रोकने के लिए लेकिन शायद मैं आखरी पल में उन्हें नहीं रोक पाए। उस पल मेरे कुछ भी नहीं था कहने के लिए न शब्द और न ही ज़ुबान जिससे में कुछ कह पाउँगा। लेकिन मुझे ख़ुशी है कि मैं इसका हिस्सा बना और अपने जीवन कुछ नया सीख पाया। और यह पागल आगे भी अपने पागलपन से लोगों जेंडर के बारे में जानकारी प्रदान कर पाएगा। मैं किसी के लिए कुछ कहना चाहता हूँ। वह मेरे मनपसंद सदस्य हैं और उनसे मैंने शांत रहकर कार्य कारण सीखा। और अपनी जिंदहि किस प्रकार मैनेजमेंट करना चाहिए यह सीखा। वह सोमेश सर हैं। मैंने उन्हें बहुत कम बोलते देखा लेकिन उनके हर कार्य ने मेरा दिल जीत लिया चाहे वह एक्टिंग से लेकर PfP मीटिंग मनेजमेंट हो वह हमेशा सभी फेल्लोस और अपने साथियों को ध्यान रखा कभी उन्हें परेशानी नहीं होने दिया। जब वह कुछ समय के लिए हमसे दूर हुए तो हमें अच्छा नहीं लगा। हम सब ने सोमेश सर को बहुत मिस किया और मैंने तो उन्हें हमेश मिस करता था जब फ़ोन बजता तो यही सोचता था कि सोमेश सर का कॉल होगा और भाग कर कॉल उठा लेता था। I MISS YOU सोमेश सर, एंड आरुषि मैडम एंड आदित्य सर, अन्य फेल्लोस को मिस करूँगा।