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प्रतीति जयपुर 2016; प्रशिक्षण वर्कशॉप (जनवरी 28-30)

प्रतीति ने मेरे जीवन की कई पुरानी यादों फिर याद दिला दिया जिनमें बचपन की गलतियां को फिर याद दिल दिया किया जब में अपने बचपन की आयु 15-17 वर्ष की आयु में जो गलतियां करता था उन गलतियों को सही रुप से सही तरह से मुझे गलत साबित कर दिया। मुझे लगता था कि मैं अपने जीवन में कभी भी किसी का अपमान, बुरा व्यवहार, ऊंच-नीच, जातिवाद, महिलाओं और स्त्री के सम्मान नहीं करना आदि नहीं किया है लेकिन प्रतीति ने मुझे मेरे कई प्रकार के दोष और गलतियों का अहसास करा दिया। मुझे हमेशा लगता रहा कि मैंने कभी भी जेंडर (लिंग-भेद) नहीं किया लेकिन प्रतीति के माध्यम से मुझे पता चला कि मैंने कई बार (जेंडर) लिंग भेद किया है तथा किसी सम्मान नहीं कर सका। लेकिन मुझे खुशी है कि मैं प्रतीति से जुड़ने का मौका मिला तथा उनके साथ बिताए वह 6:30 बजे तक 8:30 घंटे तक तीन दिनों तक उनके साथ समय बीतने तथा जेंडर(लिंग भेद) शब्द का सही अर्थ जानने के बाद मुझे अपने आप को लेकर शर्मिंदगी का अहसास हुआ तथा अपने आप को लेकर निराशा से भरा महसूस किया। लेकिन थैंक्यू प्रतीति के सभी सदस्यों को जिन्हें मुझे मेरे गलत होने का अहसास कराया। साथ ही मैं ये भी कहना चाहता हूं मुझे तीन दिनों वर्कशॉप में बहुत कुछ जानने और सीखने का मौका मिला तथा अपने अन्य साथी और दोस्तों को समझने का मौका मिला, उनके अच्छे कार्य और विचारों को अपनाने का मौका मिला, साथ ही उनके अनुभव को प्राप्त करने का मौका मिला। मुझे नहीं पता में प्रतीति से क्या प्राप्त करके जा रहा हूँ लेकिन मुझे अपने आप को जानने का मौका मिला तथा अपनी पहचान एक व्यक्ति, पुरुष होने का अहसास हुआ। मुझे हर किसी से प्रतीति के माध्यम से कुछ न कुछ सीखने का मौका मिला, जैसे- आदित्य सर, आरुषि मैडम, सोमेष सर इन तीनों ने मुझमे अपने आत्मविश्वास को जगाने तथा अपने आप प्रेरित करने और कुछ करने हेतु बनाया इसलिए में तीनों को धन्यवाद कहूंगा।,साथ और भी मेरे साथीगण जो प्रतीति से जुड़े हों उन्हें भी थैंक्यू (धन्यवाद) कहूंगा जिनसे मुझे कुछ सीखने और कुछ न कुछ प्राप्त करने मौका मिला। जब हम इस तीन दिन वर्कशॉप के बाद वापस अपने बगरू में आये तो हमारे सभी दोस्त व साथीगण ने हमसे कई सवाल किये तथा हमसे वर्कशॉप के बारे जाने व हमें कहा जब हमने प्रतीति द्वारा चलायी गयी तीन दिन वर्कशॉप जो जेंडर (लिंग-भेद) आधारित थी उसके बारे बताया तो वे बहुत खुश हुए। तथा हमारी सहायता करने तथा इस काम को आगे बढ़ाने हेतु तैयार हो गए। उसके बाद हमने नीतू, मुकूल, रवि ने मिलकर इस पर कार्य शुरू किया तथा धीरे-धीरे लोगों, लड़के/लड़कियों को इसके बारे जानकारी प्रदान करने लगे तथा साथ ही अन्य गतिविधियों के माध्यम से उनको जानने तथा उनके मन की बात एवम इच्छाएं जानने की कोशिश की। तथा धीरे धीरे हम इस कार्य में इस तरह खो गए कि हमें समय पता भी नहीं चला तथा उनसे बात करने बा जो हमें अंदर खुशी मिली वह बहुत आनंददयाक थी। तथा हमारे द्वारा उनको दिए गयी जानकारी से वह बहुत खुश नज़र आये। तथा आगे भी हमारे साथ जुड़ने हेतु आगे आएं ये अनुभव हमारे लिए काफी आश्चर्यजनक था। तथा हमें अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा था कि हमने इस काम किया है। तथा आगे भी हम इस काम को जारी रखेंगे तथा अपने विशाखा समुदाय और अन्य समुदाय जारी रखेंगे जिससे इस जेंडर (लिंग भेद) असमानता शब्द को मिटा सके या कम कर सके। साथ ही मुझे व मेरे दोस्त व साथी गणों में परिवर्तन नजर आए जो मुझमें पहले नहीं था। कुछ बदला-बदला सा रहने लगा तथा अपने बातों को आराम से तथा दूसरों की बातों को आराम सुनने लगा तथा समझने लगा। तथा इससे मेरे जीवन कई बदलाव आए तथा आगे भी मेरे जीवन में कई बदलाव देखने को मिले।

विशाखा महिला शिक्षा एवं शोध समिति जयपुर

विशाखा महिला सशक्तिकरण एवं युवा खुशहाली केंद्र

बगरू (जयपुर)

रविशंकर शर्मा