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प्रतीति के बारे में मैंने बहुत पहले प्रतीति की बेवसाइट पर पढ़ा था। और उसी समय से लेकर में अभी तक प्रतीति का हिस्सा बनने का प्रयास कर रहा था।

प्रतीति को लेकर मेरे मन में खासकर जेंडर एवं लैंगिक भेदभाव पर स्वयं की कानूनी एवं तथ्यों द्वारा जानकारी एवं एक जेंडर कार्यकर्ता के रुप में अपने आप को तैयार करने की इच्छा को पूरा करना था! जैसे कि प्रतीति द्वारा सूचना मुझे प्राप्त थी कि प्रतीति एक कार्यक्रम है। जो की सामाजिक लिंग भेद को लेकर युवाओं को तैयार करता है। जो की अपने कार्यक्षेत्र में जाकर लिंग भेद जैसे जटिल और ज्वलनशील मुद्दे पर कार्य करना शुरु कर सके।

अभी तक मैंने बाल अधिकार, महिला हिंसा, युवा रोजगार एवं समूह गठन, CMC ग्रुप, बाल कैबिनेट, मोहल्ला समिति आदि समूह एवं मुद्दों पर कार्य किया था। जेंडर जैसा शब्द तो कहीं न कहीं जहन में था, कभी विस्तार से जाना नहीं था कि आखिर ये होता क्या है। इस प्रकार का समाज एवं कौन लोग या वर्ग इसमें शामिल हैं।

इसे जानने की इच्छा तो थी ही परन्तु साथ ही इस पर कार्य करने की ललक भी थी। पर सही जानकारी न होने के कारण कहीं न कहीं एक प्रकार का डर होता था कि किस प्रकार कार्यस्थल पर जेंडर को लेकर बातचीत की जाए। प्रतीति की प्रथम तीन दिवसीय कार्यशाला के बाद कई द्वन्द जो दिमाग में चल रहे थे वह काफी हद तक दूर हुए हैं। एवं वर्तमान में जेंडर को लेकर बातचीत शुरु कर पाने में कठिनाई नहीं आती।

जेंडर में मुख्य रुप से अभी तक लैंगिक भेदभाव कार्य का बंटवारा लिंग के आधार पर , सामाजिक शक्ति की हवा, एक तरफा निर्णय, बालिका आज़ादी व आदि बिंदुओं पर गतिविधियों के माध्यम से एवं उदाहरण के द्वारा सत्र लिए गए हैं। एवं स्वंय की योग्यता को प्रशिक्षणार्थी (trainer) के रुप में बनना और गतिविधियां करना शुरु किया है।