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प्रतीति का सफर मेरा बहुत ही अच्छा रहा और यादगार सफर रहा बहुत से नए साथी मिले, नए दोस्त बने और साथ में बहुत कुछ सीखने को मिला।

जब मैंने प्रतीति का form भरा था, तो बस इतना पता था कि जेंडर को लेके बातचीत होगी पर क्या होगी? ये नहीं पता था। हाँ! पर अंदाज़ा जरुर लगाया था कि शायद, गे, लेसबियन, स्ट्रेट, ट्रांसजेंडर को लेकर बातचीत होगी।

पर जब training attend की तो लगा कि जो मैं सोच बना के आई थी, ये तो एकदम अलग ही है।

प्रतीति के द्वारा पता चला कि gender actual में होता क्या है।

प्रतीति के training में सबसे अच्छा लगा कि जेंडर को लेके मेरी एक समझ बन गई है। की gender क्या है।

हमारे समाज में जो भी लिंग आधारित हिंसा, भेदभाव हो रहा है वो सिर्फ लिंग को लेकर हो रहा है।

प्रतीति के जरिए पता चला कि कोई भी काम लड़का या लड़की पर depend नहीं करता है। काम depend करता है तो केवल  काबिलियत पर depend करता है।

और भी जो नया सीखने को मिला वो है “धारणाएं”- धारणाएं जो हम बना लेते हैं और सालों तक उसे ही चलाते रहते हैं। जिससे की हमारी सोच negativity की ओर बढ़ती चली जाती है। और और धाराणाएं ही है जो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं।

और जो most important सीखने को मिली और जो हमारे कार्य करने में भी सहयोग देगा जिसके द्वारा व्यक्तिगत क्षमता का निर्धारण होता है. वो 3 zone जो हमारी life में बहुत ही important role play करते हैं।

हम हर दिन कभी सहज, कभी खींचाव, कभी असहज महसूस करते हैं।

बस हमें असहज स्थिति को खींचाव में लाकर अपनी सहजता का दायरा बढ़ाना चाहिए। 3 zone आगे चलकर काम में बहुत ही साथ देंगे।

प्रतीति की training में आकर हमें खुद की पहचान मिली, कि हम में क्या खूबियां है, हमारे क्या गुण है, मुझ में क्या खासियत है प्रतीति के जरिए खुद की पहचान को पहचानने का मौका मिला।

मैं PfP की पूरी टीम को Aditya Bhaiya, Arushi di, Purvi di, Somesh Bhaiya सभी को thank you बोलूंगी कि आपने हमें select किया और हमें प्रतीति का हिस्सा बनने का मौका मिला।

और एक बात जो मेंटर आरुषि दी ने last day में personally लिख के दिया था, वो message मेरे लिए बहुत ही मोटीवेशनल है… उसे जब भी पढ़ती हूं एक positive energy मिलती है।

Specially thanks for Arushi Di For this message 🙂

Gender की training के बाद जो मुझ में बदलाव आया है कि gender कब और कहां-कहां पर होता है एक समझ बनती जा रही है। घर में भी gender को लेकर बातचीत करने लगी हूं।